चित्र पर किलिक करें

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

My Visit to Kataraniya Ghat (U.P.) Slideshow Slideshow

My Visit to Kataraniya Ghat (U.P.) Slideshow Slideshow: TripAdvisor™ TripWow ★ My Visit to Kataraniya Ghat (U.P.) Slideshow Slideshow ★ to BAHRAICH (near Warangal). Stunning free travel slideshows on TripAdvisor
आलमगीर मस्जिद :जहाँ एक शाम 
औरंगजेब ने की थी नमाज अदा
हैदराबाद - नागपुर राष्ट्रिय राजमार्ग नंबर सात पर निज़ामाबाद जिले के कमारेड्डी तहसील का एक गाँव पड़ता है ,जिसे बिस्वापुर के नाम से जाना जाता है |
जब आप निज़ामाबाद से हैदराबाद की ऑर चलेंगे तो रास्ते में बाएं ऑर एक मस्जिद दिखाई देगी,जिसकी एक मीनार जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है | यदपि हाल ही में वक्फबोर्ड ने इस मस्जिद की मरम्मत का काम करवाया भी  है , जिसकी दीवारों पर रंगरोगन तक कर दिए गए है ,लेकिन एक मीनार को पुरातत्व के निर्देश पर वैसा ही छोड़ दिया गया है |जिससे इसके पुराने होने का अहसास लोगों को हो सके | इस मस्जिद को "आलमगीर मस्जिद" के नाम से जाना जाता है |इसके बारे में बताते हैं की जब बादशाह औरंगजेब दक्षिण पर अपनी पताका फहराने के लिए दक्खिन की ऑर जा रहे थे तो एक शाम उनकी यहीं पर पड़ने वाली थी| इतिहास में इस बात का उल्लेख है कि वह  कट्टर ,धर्मांध प्रवृति वाला शासक था,इस लिए उसके निर्देश पर इस मस्जिद का आनन-फानन में निर्माण करवाया गया, जिसके बगल में वजू करने के लिए कुआँ भी खुदवाया गया  | कहते हैं कि जब औरंगजेब यहाँ पहुंचा तब तक सूर्य पश्चिम की ऑर अस्त होने चल पड़े थे,शाम हो चली थी ,औरंगजेब अपने लाव-लश्कर के साथ मस्जिद में रुका ओर शाम की नमाज अदा की | इतिहासकरों के अनुसार औरंगजेब में एक विशेषता थी कि वह किसी भी मस्जिद में  नमाज अदा करने के बाद "सलाम -वाल -ऐ -कुम "बोलता था,अगर इसकी प्रतिधव्नि उसे नहीं सुनी देती तो वह उस मस्जिद को तुरंत गिरव देता |शायद उसे इस मस्जिद में वह ध्वनी सुनी दे गई थी ,जिसके कारण उसने इस मस्जिद को वैसा ही छोड़ कर आगे निकल गया | विगत  कई शताब्दियों से यह मस्जिद उपेक्षित पड़ा हुआ था |जिसकी सुध वक्फ बोर्ड कमारेड्डी के अध्यक्ष एम्.ऐ.माजिद ने लेते हुए  लोगों से मिलकर जीर्णोधार का काम शुरू  करवाया | यदपि अभी भी वहां पर नमाज नहीं पड़ी जारही है |उधर से आने जाने लोग देखते हैं और चले जाते हैं |जब आप इधर से गुजरें तो इसे जरुर देखने,इसके मीनारों पर की गई नक्काशी देखने योग्य है |
चलते -चलते यह भी बताना उचित समझता हूँ कि जब औरंगजेब के हैदराबाद आने की खबर रियासत के निजाम "कुली क़ुतुब शाह " को लगी तो वह व्याकुल हो उठे कि अहिं औरंगजेब की बुरी निगाह "चारमीनार"पर न पड़ जाये,और वह उसे गिरवा दे | उनहोने तुरंत चारमीनार की उपरी मंजिल पर एक छोटी मस्जिद का निर्माण करावा दिया |बताते हैं कि औरंगजेब हैदराबाद पहुँचाने के बाद चारमीनार के बगल स्थित बड़ीमस्जिद  (मक्का मस्जिद ) में नमाज अदा की और चार मीनार का अवलोकन किया | बताते हैं कि उस समय उसे चारमीनार के वहां होने पर कुछ अजीब लगा था,लेकिन जब वह उसके उपरी हिस्से में पहुँच और वहां पर मस्जिद देखी, और उसका मन बदल गया |



                                                                                                          प्रदीप श्रीवास्तव

मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

अब महंगा पड़ेगा " ताज "देखना 
आगरा । दुनिया भर के सैलानियों को अपने संगमरमरी हुस्न से मंत्रमुग्ध करने वाले ताजमहल का दीदार महंगा होने जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग [एएसआइ] ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब विदेशियों के लिए 1500 रुपये का टिकट होगा। साथ ही ई टिकटिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। मूल्य वृद्धि के लिए दिल्ली मुख्यालय को संस्तुति भेजी गयी है।
विश्व के सात अजूबों में शुमार ताज में प्रवेश के लिए अभी भारतीय पर्यटकों को 20 रुपये और विदेशी पर्यटकों को 750 रुपये का टिकट खरीदना पड़ता है। परंतु अब एएसआइ का कहना है कि विदेशियों से ली जाने वाली धनराशि बहुत कम है। अधीक्षण पुरातत्वविद् एएसआइ आगरा सर्किल आइडी द्विवेदी ने मुख्यालय को भेजे पत्र में कहा है कि ताज की सुरक्षा में तैनात सीआइएसएफ को किया जाने वाला भारी-भरकम भुगतान, प्रवेश शुल्क से होने वाली आय से बहुत ज्यादा है। लिहाजा, ताज में प्रवेश की टिकट दर दोगुनी कर देनी चाहिए। उधर, आगरा विकास प्राधिकरण भी विदेशियों से वसूले जाने वाली पथकर की दर को दोगुना करने जा रहा है। वह इसके लिए एडीए बोर्ड में लगभग नौ माह पहले प्रस्ताव शासन को भेज चुका है। अगर दोनों प्रस्तावों को मंजूरी मिली तो विदेशी पर्यटकों को ताज के दीदार के लिए 1500 रुपये चुकाने होंगे। इसके अलाव ई-टिकटिंग के लिए भी एडीजी प्रशासन, एएसआइ दिल्ली को पत्र भेजा है।
आइडी द्विवेदी का कहना है कि 'प्रवेश शुल्क की आय के मुकाबले खर्च ज्यादा है। अभी केवल दर बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है, मंजूरी मिलने पर ही इसमें आगे कार्रवाई की जाएगी।'

रविवार, 7 अगस्त 2011

पर्यटकों को लुभाने का नया तरीका

 जर्मन में पर्यटकों को लुभाने का नया तरीका 
 जर्मनी क़ी हैम्बर्ग स्थित विन्नी नेल्स्तर्स झील इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है | जहाँ पर झील के बीच बैठी एक महिला स्नान कर रही है| झील से महिला का केवल चेहरा एवं उसकी दो टांगों का उपरी हिस्सा (घुटने )ही दिखाई दे रहा है |जिसे देखने के लिये हजारों पर्यटक हैम्बर्ग के विन्नी नेल्स्तर्स झील पहुँच रहे है,और झील में नौका विहार का आनंद भी उठा रहे हैं | झील के भीच बनी इस प्रतिमा क़ी ऊँचाई चार मीटर एवम लम्बाई तीस मीटर है |जिसे तयेअर किया है शिल्पकार आलिवर वास ने |बताते हैं कि इस प्रतिमा के निर्माण में स्टाईरो फोम एवम स्टील का प्रयोग हुआ है | इसे 3 अगस्त से पर्यटकों के खोला गया है,जो अगले 10 दिनों तक खुला रहेगा |अगर आप जर्मन जा रहे हैं तो हैम्बर्ग जाना मत भूलिएगा |
                                                               |--------------- --------------------------------------- 



रविवार, 16 जनवरी 2011

 मनाली में सबसे 
  ऊंचा  बर्फ का  
    शिवलिंग
कुल्लू — पर्यटन नगरी मनाली के समीप दुनिया का सबसे बड़ा बर्फ का प्राकृतिक शिवलिंग प्रकट हुआ है। प्राकृतिक तौर पर बनने वाले इस शिवलिंग की ऊंचाई 30 फुट तक पहुंच चुकी है, जबकि यह शिवलिंग 40 फुट तक ऊंचा बनता है। इस शिवलिंग को अंजनी महादेव के नाम से जाना जाता है तथा सर्दियों के मात्र तीन माह में ही इसके दर्शन होते हैं। यह शिवलिंग 12050 फुट की  ऊंचाई पर स्थित है। लिहाजा जहां सांसें भी साथ छोड़ देती हैं वहां पर 30 फुट ऊंचे शिवलिंग को देखने के लिए श्रद्धालु जान जोखिम  में डाल कर पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि इस शिवलिंग के दर्शन से हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। यह शिवलिंग अमर नाथ के बाबा बर्फानी के  शिवलिंग से भी काफी बड़ा व ऊंचा  बनता है। यहां के इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए, तो बताया जाता है कि माता अंजनी ने यहां मुक्ति पाने के लिए तपस्या की थी और उस दौरान भगवान शिव ने दर्शन  दिए थे तभी से यहां पर प्राकृतिक तौर पर बर्फ का शिवलिंग बनता है। इस शिवलिंग की देख रेख करने वाले बाबा नंदु ने बताया कि आज भी शिव भगवान रात 12 बजे अपने गणों  के साथ यहां आते हैं और यहां  नृत्य करते हैं। बाबा नंदु ने बताया कि हर रात यहां पर देवताओं का दरबार सजता है और सभी श्रद्धालु भगवान शिव सहित अन्य देवता गणों की आवाज को महसूस कर सकते हैं। खास बात यह है कि बर्फ के बीच नंगे पांव चलकर अंजनी महादेव के  दर्शन किए जाते हैं और श्रद्धालुओं को यह बर्फ नहीं काटती है। गौर रहे कि बर्फ मेें चलने से गैंगरिंग होती है, परंतु यहां पर ऐसा दैविक चमत्कार है कि बर्फ में नंगे  पांव चलने से भी श्रद्धालुओं का बाल बांका नहीं होता है। आजकल जहां शिवलिंग  को देखने के लिए श्रद्धालु मनाली से पैदल यहां पहुंच रहे हैं, वहीं विश्व भर का मीडिया भी यहां शिवलिंग को अपने कैमरे में कैद करने को यहां पहुंच रहा है। यह शिवलिंग विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी सोलंग नाला से अढ़ाई किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने के बाद दिखाई देता है। यहां आज भी भगवान शिव व उनके गणों का दरबार सजता है इसके प्रत्यक्ष साक्षी बाबा नंदु हैं, जो पिछले क ई वर्षों से शिवलिंग की देखरेख कर रहे हैं। उन्होंने इस बात  का खुलासा किया है कि यह शिवलिंग फरवरी माह  तक 40 फुट तक की ऊंचाई छू जाता है और रोज रात यहां देवी-देवताओं की चहलकदमी की आवाज सुनाई देती है। उन्होेंने बताया कि माता अंजनी ने मुक्ति प्राप्ति के लिए इस स्थान पर तपस्या की थी और भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। इस स्थान पर पहुंचना खतरे से खाली नहीं है भारी बर्फ के बीच प्राकृतिक तौर पर विराजमान हुए बाबा बफ र्ानी के दर्शन के लिए अमर नाथ से पहले लोग मनाली पहुंच रहे हैं। एक ओर जहां अमर नाथ में बाबा बर्फानी का  शिविलिंग आठ से दस फीट तक ही रह पाता है, वहीं यहां भोले नाथ  क ा शिवलिंग 30 फु ट तक बन चुका है, जो जल्द ही 40 फुट तक पहुंच जाएगा।